सूनी काली रातें...
कुछ बीती बातें...
और मैं ;अविचलित!
बिछड़ते हुए अक्स...
कुछ बीतीं यादें...
और मैं ; अविचलित!
बड़े होते बच्चे...
कुछ शरारतें सुहानी...
और मैं ; अविचलित!
अपनों से दूर होता भरोसा...
कुछ गद्दारियां नमकीन..
और मैं ; अविचलित!
जर्जर होता शरीर...
बंज़र होते सपने...
और मैं ; अविचलित!
ईश्वर पर बढ़ती आस्था..
ज़िन्दगी की छूटती गाडी और मैं ;
अविचलित!
साथ साथ चलते.. गुज़रता सफर...
तेरा हाथ थामे चलती ... ज़िन्दगी..
कौन पहले?
रह रह कर डराता.. वक़्त..
हमारा शास्वत प्यार और मैं ; अविचलित! "
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