Friday, May 12, 2017

लौट आया!

लौट आया ;
इक शादी गुलज़ार कर !
वापस आया तो -
घर के रिश्ते ...
फ़रिश्ते लगे !

लौट आया ;
इक शहर से ..
दो दिन गुज़ार के !
वापस आकर ..
अपने गाँव की ..
मिटटी अच्छी लगी !

लौट आया ;
फैशन के बिग बाज़ार से !
घर आकर ..
सूती निक्कर और बनियान,
अच्छी लगी !

लौट आया ;
रिश्तों के मायाजाल से !
घर आया तो ..
ज़िन्दगी फटेहाल ..
अच्छी लगी !

लौट आया ;
अनगिनित ...
ख्वाब निहार के !
घर आया तो ...
अपनी बेरंग हक़ीक़तें ..
अच्छी लगी !

लौट आया ;
गहनों से लदे मकड़जाल से !
घर आकर ..
अपनी तंगदिली ..
अच्छी लगी !

किसी ने क्या खूब कहा है -
"जब भीड़ में होता हूँ तो ; अकेला होता हूँ !
जब अकेला होता हूँ तो ...
तन्हाई साथ होती है !"

No comments:

Post a Comment