आज बहुत करीब से दीदार हुआ ज़िन्दगी से !
सच आँखें ठहर गईं और जुबां बेज़ुबां हो गई !
1) एक इंसा सड़क किनारे पालथी मारे बैठा था और उसकी बीवी चूल्हे से रोटी सेंक उसको गरम् गरम् परोस रही थी !
कुत्ता उसके बगल में बैठा था और वो इंसा रोटी का एक टुकड़ा कुत्ते को भी सरका देता था !
2) सड़क किनारे के सरकारी हैंडपंप में एक बेटी अपने परिवार के कपड़े धो कर बेशरम की टहनियों पर सुखा रही थी !
3) वहीँ उसी हैंडपंप पर दो छोटे भाई बहन अपनी बच्चा साइकिल बड़े जतन से धो रहे थे !
4) एक छोटा बच्चा डरते डरते आइसक्रीम वाले से पूंछ रहा था -"भैया दो रुपए वाली है ?"
और ...
5) एक अस्सी साल के बुजुर्ग अपनी बुजुर्ग पत्नी को साइकिल पर बैठा कर और धड़का कर सरकारी अस्पताल इलाज़ करवाने ले जा रहे थे !
सच ...यार सब बेकार है !
"गौतम बुद्ध या महावीर जी ने जो दृश्य देख सांसारिक मायामोह त्यागा था ; उससे यह दृश्य कुछ कम नहीं हैं !"
सरकारी योजनाएं ...
पुत्र सुख ...
बुढ़ापे की लाठी ...
अमीरी और गरीबी ...
लोकतंत्र ...
सब बकवास है !
सिर्फ इंसानियत ..
पति पत्नी का रिश्ता ..
ही सत्य है !
कभी देखा है आपने ...
जब बुजुर्ग पिता से कोई पुत्र समय निकाल कर बातें नहीं करता हो और वे पिता जानवरों से ही बतियाते हों ?
हक़ीक़त में सब बकवास है !
हम फ़ालतू में दौड़ते रहते हैं और आखिर में थक कर बैठ जाते हैं !
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