"अच्छे दिनों" का इंतज़ार करता लवकुशनगर का शिक्षा विभाग !
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लवकुशनगर !
नए शिक्षा सत्र के शुरू होते ही छतरपुर जिले की यह तहसील शिक्षा के क्षेत्र में अपनी बदनसीबी का पुराना रोना रोने लगी है !आलम यह है की -नगर के प्रमुख सरकारी स्कूलों एवं महाविधालय में प्राचार्य ,प्रोफेसर एवं बाबू तक "अप -डाउन " कर के मात्र कागज़ में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं परन्तु हकीकत में शिक्षा के स्तर से इनका कोई लेने देना नहीं है !
बालक उत्कृष्ठ उचत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य आर के चौरसिया जहाँ रोज महाराजपुर से "अप -डाउन " विगत वर्ष से कर रहें हैं वहीँ शासकीय कन्या उचत्तर माध्यमिक विधालय के भी यही हाल हैं। यहां पदस्थ प्राचार्य एस के उपाध्याय भी विगत सत्र की भांति छतरपुर से प्रति दिन आते जाते हैं।
शासकीय महा विधालय के तो और भी बुरे हाल हैं। आहरण एवं वितरण के अधिकार जहां महाराजा कालेज की वियाख्याता स्नेहलता खरे के पास हैं वहीँ प्रशासनिक अधिकार गीता पटेरिया महाराजपुर महाविद्यालय के पास हैं। एक पूर्ण रूपेण प्राचार्य की बाट आज भी लवकुशनगर शासकीय महाविद्यालय जोह रहा है। वहीँ दूसरी ओर पांच लिपिक के पद स्वीकृत होने के बावजूद एक उच्च श्रेणी लिपिक "धूरिया बाबू जी " प्रतिदिन छतरपुर से "अप -डॉउन " कर किसी प्रकार महाविधालय को खिसका रहें हैं। जब उनसे पूंछा गया की वे "आप -डाउन " क्यों करते हैं तो उनका कहना था की -महाराजा कालेज की प्रिंसिपल से अनुमोदित करवाने के लिए उन्हें छतरपुर आना पड़ता है। उसी प्रकार शासकीय बालिका हरिजन छात्रावास में पदस्थ प्रभारी लकड़ा मैडम प्रतिदिन ड्यूटी करने के उपरांत रात्रि में बालिकाओं को छोड़ लवकुशनगर ब्लॉक के पीछे स्थित अपने निवास आ जाती हैं।
जहाँ एक और पूरा राजस्व/पुलिस अमला एस.डी.एम. एवं तहसीलदार को मिला कर तहसील मुख्यालय में पदस्थ रहता है वहीँ शिक्षा के कर्ता धर्ताओं का "आप -डाउन " करना न सिर्फ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है अपितु भाजपा के "नमो मंत्र " अच्छे दिन का भी भद्दा मजाक है।
प्रशासन ध्यान दे !
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