एक प्यारी
बेटी का अपने पापा को खत.....................
शाम हो गयी....
घूमने चलो न पापा.......
चलते चलते थक गयी.....
कंधे पे बिठा लो न पापा!
अँधेरे से डर लगता है.....
सीने से लगा लो न पापा....
मम्मी तो सो गयी......
आप ही थपकी देकर सुला दो न पापा......
स्कूल तो पूरी हुई -
कॉलेज जाने दो न पापा...
जब डोली में बिठा ही दिया .....
तो आंसू तो मत बहाओ न
पापा......
आपकी मुस्कराहट अच्छी है -
एक बार मुस्कुराओ न पापा.....
आपने मेरी हर बात मानी......
एक बात और मान भी जाओ न पापा .....
इस धरती पे बोझ नहीं हूँ मैं
दुनिया को समझाओ न पापा !!!
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