Tuesday, July 29, 2014

मेरी बेटी!

एक प्यारी
बेटी का अपने  पापा को  खत.....................

शाम हो गयी....
घूमने चलो न पापा.......

चलते चलते थक गयी.....
कंधे पे बिठा लो न पापा!

अँधेरे से डर लगता है.....
सीने से लगा लो न पापा....

मम्मी तो सो गयी......
आप ही थपकी देकर सुला दो न पापा......

स्कूल तो पूरी हुई -
कॉलेज जाने दो न पापा...

जब डोली में बिठा ही दिया .....
तो आंसू तो मत बहाओ न
पापा......

आपकी मुस्कराहट अच्छी है  -
एक बार मुस्कुराओ न पापा.....

आपने मेरी हर बात मानी......
एक बात और मान भी जाओ न पापा .....

इस धरती पे बोझ नहीं हूँ मैं
दुनिया को समझाओ न पापा  !!!

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