"कोशिश तो मैंने भी करी थी ……
मारना तो मैं भी चाहता था …………
जज्बा देश के खातिर मेरा भी था .............
पर
नसीब न हुई वो मौत
जो
तेरे सर का ताज बनीं। "
"मनपसंद मोहब्बत और मौत नसीब वालों को मिलती है मेरे भाई …………
तू खुशकिस्मत था कि -
तेरी 'मोहब्बत' देश था और 'मौत 'देश की लाज खातिर हुई। "
"सलाम उस मिटटी को -जहाँ तू दफ़न है।
सलाम उस मोहब्बत को जहाँ तू आज भी जनम जनम के लिए कैद है।
सलाम उन माँ -बाप को जिनकी तू ख्वाईश था।
सलाम उस झंडे को जिसकी खातिर तूने सीने पे गोली खाई। "

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