Saturday, July 5, 2014

हिसाब!

कब से हिसाब लगा रहा हूँ -
बारिश में तन से चिपका तन को उकेरता कुरता अच्छा या
दोनों हाथों से तन को ढंकती लाज से दोहराती बालों को निचोड़ती ज़िन्दगी?

नग्नता अच्छी या भग्नता ?

प्रेम में डूब कर "आई लव यू " कहना अच्छा या नजरें झुका कर "लब" थरथराना?

अपने उन्मुक्त लिबास में बिना दुपट्टे के ज़िन्दगी जीना अच्छा या
अपना आँचल झीने दुपट्टे से ढँक कर रहना अच्छा?

अपने हाथ से लिख कर प्रेम की पाती देना अच्छा या इक "power point E Mail में अपना प्यार कहना?

कभी अकेले मिलने पे -
पलकें मूँद कर आँखों के रास्ते दिल में बसाना अच्छा या
मर्यादा की कुलांचे मारना?

कस्मे -वादे,
शाश्वत प्रेम,
तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी,
इस जनम में आपकी,
आपकी "सबकुछ "
मुझे भूल जाना प्लीज,
जैसी बातें सच और सार्थक या....

तुमने मुझे use किया,
सब चलता है,
so what ; it happens -shit
जैसी बातें?

बहुत दूर छत से अपना प्यार देखना अच्छा?
या छत पे मिलना?

प्यार में पर्दा अच्छा या
बेपरदिगी?

सोचना होगा?
कभी न कभी?
कहीं न कहीं!

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