Wednesday, January 13, 2016

गुज़रा हुआ ज़माना... आता नहीं दुबारा!

गुज़र गया वो वक़्त भी.. जो तेरी यादों से सराबोर
था....
अपने मौजूं के साथ!!!

वक़्त भी निकला तेरी तरह हरजाई...
कुछ दिन साथ चला फिर आगे निकल गया...
ठीक तेरी तरह...
मेरा मजाक उडाता हुआ!

और मैं भटकते भटकते...
रह गया हूँ ;
अकेला....
उस कफ़न की मानिंद...
जो रह जाता है-
अक्सर अकेला....
इंसान के गुज़र जाने बाद!

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