सत्य!
शिथिल जरूर है ;
रूका नही है...
थका जरूर है...
पर पराजित नही है!
सदा रहा है...
सदा रहेगा,
सत्य सार्थक...
झुका नही है।
मद ताकत का...
या दौलत का,
पथ भटका देता है..अक्सर!!
नशा कोई भी हो चाहे, जीवन भटका देता है अक्सर॥
चाल चलन तय करता है, दुनिया में सबकी सही जगह।
केवल कर्म दिलाते है, दुनिया में सबको सही जगह॥
सत्य सादगी और प्रेम ही, मूल मंत्र है जीवन के।
किसे मिला....
सम्मान जगत में,
नफरत के पथ पर चल के॥
चले गये जग से...
सब खाली हाथ,
वो दौलत वाले भी
बिन कपडों...
बिन आभूषण ही,
महल दुमहले वाले भी॥
सत्य यही हैं...
और सच्चाई भी
इसका किसी भी युग में मुका नही है....
सदा रहा है...
सदा रहेगा,
सत्य सार्थक.
झुका नही है!!
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