Tuesday, January 5, 2016

पठानकोट!

पठानकोट!
इक हादसा -
कुछ टूटी चूड़ियाँ...
कुछ उजड़ी मांगें...
कुछ भीगी पलकें और
कुछ पथराई आँखें!

पठानकोट!
कुछ तुतलाते लफ्ज -"पापा!"
कुछ सिसकती आवाजें -भैया!
कुछ दबी दबी चीत्कारें -
प्रिये! और
कुछ कराहते क्रंदन -बेटा!

पठानकोट!
बीस लाख और नौकरी..
शहीद का दर्जा..
तिरंगे में लिपटा शरीर... और
बंदूकों की सलामी!

पठानकोट!
दीवार पर फ्रेम की हुई माला से लिपटी -तस्वीर!...
नेताओं की सांत्वना..
पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देने का वादा.... और
छब्बीस जनवरी को -लाल किले की प्राचीर के पास -सफ़ेद वस्त्रों में लिपटी "पद्मिनियों" को "रिजर्व्ड" कुर्सियां!

पठानकोट!
कुछ नहीं... बस...
ज़िन्दगी भर के आंसूं...
ता उम्र टूटे ख्वाब..
विरह का लम्बा जीवन..
न जाने किसका -श्राप???

पठानकोट!
निशब्द...
निर्विकार...
दीवार की तस्वीर और
चीत्कार!

(गौरव!)

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