Thursday, June 2, 2016

बिजनेस पार्टनर!

अपने ही लोग...
तौलते रहते हैं...
मेरा वजन...
और वज़ूद..
नित!

कभी कभी...
झुक जाते हैं.....
मेरे पैरों तले....
और बढ़ा देते हैं....
मेरा वजन और कद एकदम से!

तो कभी...
तांश के पत्तों सा... बिखेर देते हैं...
मेरा वज़ूद...
जब बात...
चल निकलती है -
पैसों और व्यापार की!

सच! बहुत हल्का हो जाता है...
मेरा वजन...
जब कभी-कभी...
खुश फहमियां...
हावी होने लगतीं हैं... की
मैं भी कुछ हूँ...
किसी घर का..... वटवृक्ष..
या किसी व्यापार का कल्पतरु वृक्ष!

सच!
जन्म से मरण तक के...  कुदरती रिश्तों पर...  कितनी जल्दी...
हावी हो जाता है...
ये बिज़नेस पार्टनर...
नाम का इंसान!

बना लेता है...
अपनी पैठ और पकड़....
और....
एक ही माँ की....
कोख से उपजे...
भाइयों के रिश्तों को.... बना देता है कूड़ादान!

वाह भाई!
वाह बिजनेस पार्टनर!
क्या जुगाली है...
क्या दोस्ती है....
जिसने...
पैसों से तौल दिया है...
दो भाइयों का वजन..  और वजूद...
और साबित किया है... की -माँ की कोख से...  ज्यादा ताक़तवर...
होती है..
पैसों की भूंख!

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