Thursday, April 27, 2017

न कुछ कथनी है और न कुछ करनी है !!"

"एक दिन..
कुछ ऐसे ही ..
तोड़ दूंगा ये ..
रात और दिन का दुष्चक्र ..
और चल दूंगा ..
निष्चक्र ..
स्वछंद आकाश और
शायद अंतरिक्ष के दरमियान कहीं ..
बेसुध,बेआवाज़,बेवजह ...
बमुश्किल ...
चंद दशकों बाद !!

चींटी से लेकर हांथी तक ..
और इंसान से लेकर ..
हैवान तक ..
वो आएगी जरूर और
चल देगी गोद में उठा ..
बेवक़्त बेसुध और बेवजह !

इतरा मत !!
इस धरती पर ...
तेरी क्या औकात ??
रे मानव !

राम से लेकर माधव तक ..
रावण से लेकर कंस तक ..
राजकपूर से लेकर बिनोद खन्ना तक ....
और तुझ से लेकर मुझ तक ....
एक दिन औकात सबको पता चलनी है ..
सिर्फ आग जलनी है और ..
"तुझे-मुझे" ...
धुंआ धुंआ बन ...
राख बननी है !!

फिर वही ...
माँ गंगा के इलाहाबाद में ..
संगम की धार मिलनी है !

न कुछ कथनी है ...
न कुछ करनी है !

बस विश्वास रख ..
हम सब की ...
वक़्त वक़्त पर ...
चिता जलनी है !

न कुछ कथनी है ...
और न कुछ करनी है !!"

Garvit Gaurav!!

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