सच्ची मोहब्बत वह है जो-
"न मुक़म्मल होने पर ..
आहिस्ता से भुला दी जाए!
न कि खुद को और ...
ज़माने भर को उसकी ...
सज़ा दी जाए !"
तू अपने इश्क़ के परदे को ..
बेपनाह पाकीज़गी से ..
पर्दा ही बना कर रख !
फिजूल बेपर्दा कर उसे ...
नुमाइशों के जलसे में ...
न तब्दील कर !
जब वो ...
रुखसत हो गई ...
तुझे अकेला छोड़ ...
अपने हमसफ़र संग !
तो तू क्यों ?
उसकी यादों को ...
"ताज़िया" बना कर ..
खड़ा है खानाबदोशों की तरह ?
अरे ; उठ और ..
झझकोर कर उखाड़ फेंक ..
ये यादें जो तुझे ...
जीने नहीं दे रही और ..
देख ..
बहुत सी नवतरंगें ...
तेरा इन्तिज़ार कर रही हैं !
याद रख !
मोहब्बत का इन्तिक़ाम ...
बर्बाद होना या ...
करना नहीं है !
मोहब्बत में बदला लेने के लिए ...
साबित करना पड़ता है कि -
देख तू गलत थी !
देख मैं टूटा नहीं ; बिन तेरे !
देख ; मैंने बन कर दिखाया अपना वज़ूद !
देख मैं झूंठा नहीं था और बेवफा भी नहीं !
Garvit Gaurav!!
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