"टेढ़ी मेढ़ी लकड़ी ..
गुज़रती उम्र ने ...
अपने हाथों से जकड़ी !
बूढी और जर्जर होती ...
मगर होंसले से भरी
पिताजी की काया ;
ईश्वरीय माया !
पिता के बाज़ू में ...
काँधे से सर टिकाये बैठी; बेटी ..
नश्वर संसार का ...
अप्रतिम आलौकिक पूज्य रिश्ता !
और
खेती या कृषि व्यवसाय !
इंसान के -
आदम से आदमीं बनने के बीच का
एकमात्र रोज़गार जो
समय के साथ
बदला नहीं !!"
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