तुम और तुम्हारी रातें !
बयाबान,घटाटोप,अँधेरी रातें ...
नरगिसी,महकती,चांदनी रातें....
बोझिल,भारी,उमस भरी रातें....
तड़पती,सुलगती,बहकती रातें. ...
लजाती,शर्माती,सिमटती मुंदती रातें..
बिछड्ती,खिसकती सिसकती,पिघलती
रातें....
अकेली,रोती,तड़पती करवटें बदलती रातें.....
आज भी...
सिर्फ तुम और तुम्हारी यादें ! "
"रातें गुजरतीं गईं...
रातें कटती गई...
रातें फिसलती गई...
और
तुम बिछड्ती गईं!
(शानू!)
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