Thursday, September 17, 2015

तुम और तुम्हारी रातें


तुम और तुम्हारी रातें !

बयाबान,घटाटोप,अँधेरी  रातें ...
नरगिसी,महकती,चांदनी रातें....

बोझिल,भारी,उमस भरी रातें....
तड़पती,सुलगती,बहकती रातें. ...

लजाती,शर्माती,सिमटती मुंदती रातें..

बिछड्ती,खिसकती सिसकती,पिघलती
रातें....

अकेली,रोती,तड़पती करवटें बदलती रातें.....

आज भी...
सिर्फ तुम और तुम्हारी यादें ! "

"रातें गुजरतीं गईं...
रातें कटती गई...
रातें फिसलती गई...
और
तुम बिछड्ती गईं!

(शानू!)

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