महाभारत के सारे पात्र …
हो गए हैं इकट्ठे ,
बिहार समर में …
लिए अपने अपने लट्ठे।
सब लिए हैं -
अपने अपने चापलूस पट्ठे ....
जो लगा रहे हैं ;
राजनैतिक सट्टे और उन्हे दम्भ है कि -
बड़ी आसानी से करेंगे वे
दुश्मनों के दांत खट्टे।
दिखने में हट्टे कट्टे और निखट्टे ,
बढ़ती उम्र ; पर चलते बड़े ही सरपट्टे,
जुबान जैसे हो आटे की चक्की के पट्टे ,
तैयार खड़े हैं -कि -
कैसे मारें झपट्टे और
इस बार फिर जनता बँट जाए किसी तरह और
मार लें बाज़ी बिहार समर की …
चाहे
अड़ाना पड़े -बच्चों के -बन्दूक और कट्टे।
समझते हैं बपौती -बिहार का सिंहासन !
बना रहे बिहार का प्रहसन !
न कोई पिछले अनेक वर्षों का यतन न जतन !
न कुछ करने की अगन और न लगन !
बस हैं अपने में मगन कि … इस बार भी -अच्छा होगा शगुन।
जीत जाएंगे वे और
विश्व पटल के मानचित्र से कर देंगे -बिहार का पांच वर्षीय गमन और
फिर उनका होगा ;सिर्फ चमन !
सिर्फ चमन !
अरे तुम्हें नहीं पता कि -
ध्रुव से भी हिरण्यकश्यप इतने ही दम्भ से बोलता था की -
"कहाँ है -तेरा ईश्वर ?बुला उसको और बचा ले अपना दमन?"
और फिर
आएगा "वो भी " ;जिसे तू अक्सर ललकारता है आज भी - की -
कहाँ है वो जो लाएगा बिहार में चमन ?"
देखना … फिर होगा तेरा दमन …
बिहार जागेगा ....
होगा नवीन हवन
ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा और भारतीयता के संकल्पों से
बिखर जाएगा -विष वमन
चमक उठेगा -इक नया सन्देश
भारतीयता के ओतप्रोत लवण !
हाँ !
हारेगा रावण !
जीतेगा श्रवण !
हाँ !
हारेगा युद्ध !
जीतेगा बुद्ध !
हो गए हैं इकट्ठे ,
बिहार समर में …
लिए अपने अपने लट्ठे।
सब लिए हैं -
अपने अपने चापलूस पट्ठे ....
जो लगा रहे हैं ;
राजनैतिक सट्टे और उन्हे दम्भ है कि -
बड़ी आसानी से करेंगे वे
दुश्मनों के दांत खट्टे।
दिखने में हट्टे कट्टे और निखट्टे ,
बढ़ती उम्र ; पर चलते बड़े ही सरपट्टे,
जुबान जैसे हो आटे की चक्की के पट्टे ,
तैयार खड़े हैं -कि -
कैसे मारें झपट्टे और
इस बार फिर जनता बँट जाए किसी तरह और
मार लें बाज़ी बिहार समर की …
चाहे
अड़ाना पड़े -बच्चों के -बन्दूक और कट्टे।
समझते हैं बपौती -बिहार का सिंहासन !
बना रहे बिहार का प्रहसन !
न कोई पिछले अनेक वर्षों का यतन न जतन !
न कुछ करने की अगन और न लगन !
बस हैं अपने में मगन कि … इस बार भी -अच्छा होगा शगुन।
जीत जाएंगे वे और
विश्व पटल के मानचित्र से कर देंगे -बिहार का पांच वर्षीय गमन और
फिर उनका होगा ;सिर्फ चमन !
सिर्फ चमन !
अरे तुम्हें नहीं पता कि -
ध्रुव से भी हिरण्यकश्यप इतने ही दम्भ से बोलता था की -
"कहाँ है -तेरा ईश्वर ?बुला उसको और बचा ले अपना दमन?"
और फिर
आएगा "वो भी " ;जिसे तू अक्सर ललकारता है आज भी - की -
कहाँ है वो जो लाएगा बिहार में चमन ?"
देखना … फिर होगा तेरा दमन …
बिहार जागेगा ....
होगा नवीन हवन
ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा और भारतीयता के संकल्पों से
बिखर जाएगा -विष वमन
चमक उठेगा -इक नया सन्देश
भारतीयता के ओतप्रोत लवण !
हाँ !
हारेगा रावण !
जीतेगा श्रवण !
हाँ !
हारेगा युद्ध !
जीतेगा बुद्ध !
बिहारी समर के बड़े और बूढ़े ताउओं... याद रखना...
हक़ीक़त रूबरू हो तो अदाकारी नही चलती,
ख़ुदा के सामने बन्दों की मक्कारी नही चलती;
तुम्हारा दबदबा तो ख़ाली तुम्हारी ज़िंदगी तक है,
किसी की क़ब्र के अन्दर ज़मींदारी नही चलती..
(गर्वित गौरव!)
(गर्वित गौरव!)

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