"जवानियाँ बीतती गई...
नसें सिमटती गई.....
झुर्रियां लिपटती गई....
सलवटें पड़तीं गई.....
कराहटें कचोटती गई...
और
उम्र ढलती गई.... "
"हर रोज़ देख लेता हूँ....
बाँध कर कोने में पटक दी गई...
हसरतों की पोटली..
ढलती उम्र में... अक्सर
डूबता सूरज अच्छा लगने लगता है! "
No comments:
Post a Comment