Wednesday, September 23, 2015

Honesty!

"जीवाश्म कुछ ही बचे हैं -
ईमानदारी के...
खुद्दारी के...
और जवाबदारी के...

इनको सहेज कर रख लो साहिब...
सैकड़ों सालों बाद...
जब फिर रचना करोगे नवमानवता की...
तो यह काम आएंगे!"

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