Thursday, October 1, 2015

गांधी और पेटेंट!

गांधी और पेटेंट!

काश "गांधी' का पेटेंट भारत सरकार के पास होता....

कम से कम... कोई क्षद्म 'गांधी' मेरे -राष्ट्रपिता गांधी के नाम की चादर तो न ओढ़ पाता!

बापू कहने पर -अक्स तुम्हारा उभरता है.. जेहन में...
पर
गांधी कहने से एक लम्बी फ़ौज़ दिखने लगती है -गांधियों की ; और जेहन से आवाज़ आती है -
कोन सा गांधी?

सच बापू!
लाठी में तुम...
चरखे में तुम...
खादी में तुम...
ऐनक में तुम...
नंगे बदन और धोती में तुम.....
आज भी नज़र आते हो...
पर
'गांधी' कहने पर नहीं!

स्वावलंबन में तुम...
एकला चलो में तुम...
सत्य वचन में तुम...
जुलूस में तुम...
मौन में तुम...
शोक में तुम...
पर -
'गांधी' में मुझे 'तुम' नज़र नहीं आते!

काश! भारत की राजनैतिक भाग्यरेखा के 'आप'  प्रथम और अंतिम "गांधी" होते!

धीरे धीरे मिटती जा रहीं हैं तुम्हारी यादें...
बहुत दिनों से -किसी  परीक्षा में भी नहीं पुछा गया की -"My Experiment with Truth!" पुस्तक किसने लिखी?

अब तो पुलिस वाले भी कभी कभी कहने लगे हैं की -"डाल दो साले को अंदर... साला गांधी बनने चला था! "

खादी भी अब अमीरों की -"इलीट" क्लास की फसल हो गई है...

आपकी खादी को -"ब्रांडेड" रूप दे दिया गया है.... और
ऐसा लगता है -की -जैसे आप बहुत ही शौक़ीन किस्म के आला दर्ज़े के फैशन परस्त इंसान थे.... जिसने खादी जैसे उम्दा किस्म के महंगे कपडे पहने...
सच अब आपकी खादी अमीरों का चलन बन चुकी है और सामान्य लोगों का ख्वाब!

"काश! तुम बापू ही रहते गांधी नहीं! "
Happy Birthday Baapu!

(गौरव!)

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