Saturday, October 10, 2015

मधुशाला के दो पात्र!

कुछ 'शब्द' उस अनकही अनसुलझी जोड़ी के नाम  जो भारतीय सिनेजगत  की Mystery बन गई और युगों युगों तक बनी रहेगी! उनका नाम न लेना ही मर्यादित होगा!
वाह रे खुदा! 
"क्या नुमाइश रची है ;मेरी मोहब्बत की! 
उनका दुनिया में आना -११ अक्टूबर को... 
और मेरा-१० अक्टूबर को! 
वो फिल्मों में और मैं भी! 
पर... 
कभी कभी.. 
सिलसिले... 
अधूरे रह जाते हैं... 
ज़िन्दगी भर सुलगने के लिए! "

"आज 'उनका' जन्मदिन है... कल 'मेरा'..था..
कल तक 'वो' 'मुझे' प्यार करते थे...
और 'मैं'; आज भी...
समंदर में नमक है या नमक में समंदर ; कुछ पता नहीं...
गहराई 'मेरे' प्यार में है या 'उनके' ; कुछ अहसास नहीं...
इक दुसरे के बिना -
ज़िन्दगी 'उन्होंने' काटी या 'मैंने' गुज़ारी .. कुछ पता नहीं..
गहराई 'उनके' अंदर ज्यादा थी या 'मेरे' ;कुछ पता नहीं..
बस..
कहानी का तबस्सुर यह है की -
'मैं' 'उनकी' नहीं और 'वो' 'मेरे' नहीं! "
शुभ जन्मदिवस!

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