Tuesday, October 13, 2015

बिहार समर! आहट वक़्त की!

बिहार समर!
वक़्त की तस्दीक़!

"मैं देख रहा हूँ ;तुझे पराजित होते...
पर तुझे जिताना भी नहीं है...

देख रहा हूँ ;तुझे डूबते हुए... पर तुझे बचाना भी नहीं है...

देख रहा हूँ ;तुझे गिरते हुए... पर तुझे उठाना भी नहीं है...

अगर इस बार... तू जीत गया तो...
तो उठ जाएगा भरोसा ज़िन्दगी का-"वक़्त की शह से! "

"इस कारण! हे राजन!
भांप ले अपनी परछाईं...
आने वाली तन्हाई...
और
क्षितिज से भोर की  उठने वाली शहनाई...
अब -
सिर्फ सत्ता से जुदाई! "

No comments:

Post a Comment