अब कम्बखक्त क्या बताएं -
क्या होता है छुपाना ……
कुछ यूँ समझ लो ....
इक तज़ुर्बा होता है -छुपाना।
इक फलसफा अपने में समाये होता है -छुपाना।
इक लम्बा थका देने वाला सफर होता है छुपाना।
शादी के पहले :
अपने मन की बात को अपने मन के अंदर छुपाना।
अपने प्यार को दुनियाँ से छुपाना।
अपने जज्बातों को अपने सपनों को छुपाना।
अपने आंसुओं को अपनी तन्हाइयों को छुपाना।
कुछ कसमों को कुछ वादों को छुपाना।
कुछ यादों को तो कुछ बातों को छुपाना।
कुछ रातों को तो कुछ मुलाक़ातों को छुपाना।
कुछ गुनाहों को तो कुछ पनाहों को छुपाना।
कुछ चोटों को तो कुछ जख्मों को छुपाना।
कुछ फरेबों को तो कुछ बेवफ़ाइयों को छुपाना।
उस पहली खामोशी को छुपाना।
उस पहली "हाँ " को छुपाना।
उस पहली चिट्ठी को छुपाना।
उस पहले रूमाल को छुपाना।
उस पहली उड़ते दोपट्टे को उढ़ाने वाली बात को छुपाना ....
और
उस भगवान के सामने मंदिर में सिन्दूर लगाने वाली बात को छुपाना।
सच ....
बड़ा कठिन होता है छुपाना !
और अब शादी के बाद :
अपनी पुरानी दास्तान को छुपाना ....
अपने मोहब्बत भरे कटु अनुभवों को छुपाना ....
यादों को ,आसुओं को और पुराने गेसुओं को छुपाना ....
बस छुपाना और छुपाना।
बच्चे बड़े होने पे :
दुःख को छुपाना ,संघर्ष को छुपाना ,आर्थिक तंगी को छुपाना
बीमारी को छुपाना ,जिल्लत को और बुढ़ापे को छुपाना
अपने आप से ;
अपनी हार को छुपाना-अपनी खीज को छुपाना
अपने सपनों को और अपनी बीती यादों को फिर न मिटने देते हुए भी छुपाना।
अपने सफ़ेद होते बालों को 'डाई' लगा कर छुपाना।
अपनी स्वांस का इलाज 'होमियोपैथी' से करने की कोशिश कर बीमारी को छुपाना …
और
जीवन साथी के सामने हमेशा की तरह हंस हंस कर सबकुछ छुपाना।
छुपाते छुपाते अपने आप को अपनों से ....
छुपाते छुपाते अपने जज्बात को अपनों से ....
छुपाते छुपाते अपनी सौगात को अपनों से …
निकल गई ज़िन्दगी।
"कल तक आईने के सामने जो निहार कर छुपाते थे अपनी मोहब्बतें
अब छुपाने लगे हैं कनपटियों के बगल से उग आई -सफ़ेद फसल। "
(उड़ते पंछी !)
क्या होता है छुपाना ……
कुछ यूँ समझ लो ....
इक तज़ुर्बा होता है -छुपाना।
इक फलसफा अपने में समाये होता है -छुपाना।
इक लम्बा थका देने वाला सफर होता है छुपाना।
शादी के पहले :
अपने मन की बात को अपने मन के अंदर छुपाना।
अपने प्यार को दुनियाँ से छुपाना।
अपने जज्बातों को अपने सपनों को छुपाना।
अपने आंसुओं को अपनी तन्हाइयों को छुपाना।
कुछ कसमों को कुछ वादों को छुपाना।
कुछ यादों को तो कुछ बातों को छुपाना।
कुछ रातों को तो कुछ मुलाक़ातों को छुपाना।
कुछ गुनाहों को तो कुछ पनाहों को छुपाना।
कुछ चोटों को तो कुछ जख्मों को छुपाना।
कुछ फरेबों को तो कुछ बेवफ़ाइयों को छुपाना।
उस पहली खामोशी को छुपाना।
उस पहली "हाँ " को छुपाना।
उस पहली चिट्ठी को छुपाना।
उस पहले रूमाल को छुपाना।
उस पहली उड़ते दोपट्टे को उढ़ाने वाली बात को छुपाना ....
और
उस भगवान के सामने मंदिर में सिन्दूर लगाने वाली बात को छुपाना।
सच ....
बड़ा कठिन होता है छुपाना !
और अब शादी के बाद :
अपनी पुरानी दास्तान को छुपाना ....
अपने मोहब्बत भरे कटु अनुभवों को छुपाना ....
यादों को ,आसुओं को और पुराने गेसुओं को छुपाना ....
बस छुपाना और छुपाना।
बच्चे बड़े होने पे :
दुःख को छुपाना ,संघर्ष को छुपाना ,आर्थिक तंगी को छुपाना
बीमारी को छुपाना ,जिल्लत को और बुढ़ापे को छुपाना
अपने आप से ;
अपनी हार को छुपाना-अपनी खीज को छुपाना
अपने सपनों को और अपनी बीती यादों को फिर न मिटने देते हुए भी छुपाना।
अपने सफ़ेद होते बालों को 'डाई' लगा कर छुपाना।
अपनी स्वांस का इलाज 'होमियोपैथी' से करने की कोशिश कर बीमारी को छुपाना …
और
जीवन साथी के सामने हमेशा की तरह हंस हंस कर सबकुछ छुपाना।
छुपाते छुपाते अपने आप को अपनों से ....
छुपाते छुपाते अपने जज्बात को अपनों से ....
छुपाते छुपाते अपनी सौगात को अपनों से …
निकल गई ज़िन्दगी।
"कल तक आईने के सामने जो निहार कर छुपाते थे अपनी मोहब्बतें
अब छुपाने लगे हैं कनपटियों के बगल से उग आई -सफ़ेद फसल। "
(उड़ते पंछी !)

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