Wednesday, April 22, 2015

ज़िन्दगी और धुप!

"चलो फिर गरम हवाओं का लुत्फ़ उठाये..
सर पे स्वाफी बाँध कर बाइक चलायें...
गर्मी की लपटों को चुनौती दें...
ज़िन्दगी को पतझड़ की अहमियत समझाएं....
अभी बहुत दूर का सफर बाकी है...
न थकूंगा न हारूँगा...
नियति का दस्तूर निभाउंगा...
ऐ ज़िन्दगी!
तू कर यकीन...
जीत कर आऊंगा! "
(गर्वित गौरव!) ������

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