"चलो फिर गरम हवाओं का लुत्फ़ उठाये..
सर पे स्वाफी बाँध कर बाइक चलायें...
गर्मी की लपटों को चुनौती दें...
ज़िन्दगी को पतझड़ की अहमियत समझाएं....
अभी बहुत दूर का सफर बाकी है...
न थकूंगा न हारूँगा...
नियति का दस्तूर निभाउंगा...
ऐ ज़िन्दगी!
तू कर यकीन...
जीत कर आऊंगा! "
(गर्वित गौरव!)
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Wednesday, April 22, 2015
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