Saturday, April 4, 2015

इंसानों के भेद !

कभी शराबियों को देखा है ?
कितने चिंतित ।
कितने बेख़ौफ़ ।
और -
कितने ग़मगीन  ?

कभी लावारिसों को देखा है ?
कितने सहमे।
कितने संकोची।
और -
कितने शांत ?

कभी अय्याशों को देखा है ?
कितने नमकीन।
कितने शौक़ीन।
और -
कितने जहीन ?

कभी प्रेमियों को देखा है ?
कितने विनम्र ।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने जुबानदार या committed ?

कभी बेवफ़ाओं को देखा है ?
कितने समझदार।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने इज़्ज़तदार ?

पर क्या कभी -
इंसानों को देखा है ?
शेर सा शिकारी।
बाज़ सा मौका परस्त।
और -
गिद्ध सा भूँखा।

शायद परिभाषाओं को बदलने का सही समय आ गया है !
काश ऐसी कोई "एन्टी -ह्यूमन वाइरस " (Anti human virus) बाजार में आ जाये जो इन इंसानो के भेद कर पाये  .... तो शायद यह ज़िन्दगी कुछ आसान हो जाये !

इंसानों के भेद !

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