कभी शराबियों को देखा है ?
कितने चिंतित ।
कितने बेख़ौफ़ ।
और -
कितने ग़मगीन ?
कभी लावारिसों को देखा है ?
कितने सहमे।
कितने संकोची।
और -
कितने शांत ?
कभी अय्याशों को देखा है ?
कितने नमकीन।
कितने शौक़ीन।
और -
कितने जहीन ?
कभी प्रेमियों को देखा है ?
कितने विनम्र ।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने जुबानदार या committed ?
कभी बेवफ़ाओं को देखा है ?
कितने समझदार।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने इज़्ज़तदार ?
पर क्या कभी -
इंसानों को देखा है ?
शेर सा शिकारी।
बाज़ सा मौका परस्त।
और -
गिद्ध सा भूँखा।
शायद परिभाषाओं को बदलने का सही समय आ गया है !
काश ऐसी कोई "एन्टी -ह्यूमन वाइरस " (Anti human virus) बाजार में आ जाये जो इन इंसानो के भेद कर पाये .... तो शायद यह ज़िन्दगी कुछ आसान हो जाये !
इंसानों के भेद !
कितने चिंतित ।कितने बेख़ौफ़ ।
और -
कितने ग़मगीन ?
कभी लावारिसों को देखा है ?
कितने सहमे।
कितने संकोची।
और -
कितने शांत ?
कभी अय्याशों को देखा है ?
कितने नमकीन।
कितने शौक़ीन।
और -
कितने जहीन ?
कभी प्रेमियों को देखा है ?
कितने विनम्र ।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने जुबानदार या committed ?
कभी बेवफ़ाओं को देखा है ?
कितने समझदार।
कितने सलीकेदार।
और -
कितने इज़्ज़तदार ?
पर क्या कभी -
इंसानों को देखा है ?
शेर सा शिकारी।
बाज़ सा मौका परस्त।
और -
गिद्ध सा भूँखा।
शायद परिभाषाओं को बदलने का सही समय आ गया है !
काश ऐसी कोई "एन्टी -ह्यूमन वाइरस " (Anti human virus) बाजार में आ जाये जो इन इंसानो के भेद कर पाये .... तो शायद यह ज़िन्दगी कुछ आसान हो जाये !
इंसानों के भेद !
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