पहली रात... बिन पापा!
"इन दुखी क्षणों में...
जब एक पांच साल के बेटे ने...
अभी अभी - कुछ घंटों पहले...
अपने वीर पिता (कर्नल संतोष महाडिक) को.... अपने मासूम कन्धों से... कांधा और अग्नि दी हो...
कैसे सो जाऊं -
निश्चिंत?
आज घटाटोप अँधेरी काली रात...
बहुत लम्बी होगी...
माँ -पुत्र और पुत्री के लिए...
जिनके पिता की चिता अभी शांत भी न हुई होगी..
क्या दर्द होगा...
उस पत्नी का.. जिसके
एक बाज़ू में -पुत्र होगा..
और एक में ;आसुओं से भीगी पुत्री..
वो खुद रोये या बच्चों को चुप कराये?
विकट ...
विराट... और
विलक्षण बलिदान!
कर्नल संतोष!
देश नतमस्तक है...
आपके जीवट पर..
आपके शौर्य पर... और
आपके उत्त्कृष्ट सर्वोच्च बलिदान पर...
कोटि कोटि प्रणाम! "
(गौरव!)
No comments:
Post a Comment