उम्र के साथ -
हिमखंड पिघल गए..
प्राचीर झुक गए...
शाख ढल गए... और
हम इतिहास बन गए!
मोहब्बत-फ़लसफ़ी बन गई...
सोहबत-तोहमत बन गई..
बातें यादों में तब्दील हो गई और
हम इतिहास बन गए!
गुरूर गुलमोहर बन गया.. जोश को होश ने हरा दिया...
जवानी बुढ़ापा बन गई... और हम इतिहास बन गए!
ज़िन्दगी -बरसों में तब्दील हो गई...
तो उम्र सालों में..
जुल्फें सफेदी में...
तो कमर लाठी में.. और आँखें -मोतियाबिंद में..
और हम धीरे से इतिहास बन गए!
सच बहुत जल्दी..न..
बादल बरस गए..
बिजली चमक कर गिर गई..
सावन गुज़र गया... और दोपहर तक...
ढल कर... ज़िन्दगी को साँझ कर गई!
सच कितनी जल्दी साँसे चलने की...
उम्र निकल गई...
और हम इतिहास बन गए!
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