वो चुप हैं.. कोई गम नहीं....
कोई भ्रम भी नहीं ;क्यूंकि
वो किसी के -पिछलग्गू तो नहीं!
जब वो बोलेगा.. तो बोलोगे की -बोलता है..
अरे! देश के प्रधान सेवक हैं...
वो जब जितना उचित होगा बोलेंगे!
तुम थोड़ी बताओगे की -कब क्या क्यों और कितने इंच तक -मुह खोल कर क्या बोलना है!
ज़माने लद गए.... जब तुम बताते थे और वे बोलते थे!
अब नया ज़माना है...
अब देश में -
तुमसे ज़्यादा तो -
शेर हैं!
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