पतन और दमन!
"ध्यान उनका देश नही..
प्रेम उनका देश नहीं..
ज्ञान उनका देश नहीं...
सिर्फ
भेष उनका देश है!
जितना कष्ट ब्रिटिश राजशाही को था भारत की सत्ता से बेदखिली पर..
उतनी ही इंतेहा से...
दर्द झलकता है -उनका
विपक्ष में बैठ कर..
लार्ड माउंटबेटन की तरह होती अगर कोई आखिरी वाइसराय की कुर्सी...
तो
दे देता युवराज को वो भी...
क्यों की..
अब दोबारा कभी वे भारत की गद्दी पर विराजमान नहीं होंगे!
बस हो गया है उनका पतन...
अब चाहे कर लें वे जितने
जतन..
सफल न होंगे उनके यतन...
अब दमन.. अब दमन..
तुम्हारे कहने भर से...
नहीं दे पाओगे 'नमो' को तुम टशन...
सवा सौ करोड़ जनता की "स्कैनिंग आई " ने
चुना है उसको अपना रतन...
अभी और देखोगे तुम -नमो का चरम...
तुम्हें है भरम.. के तुमने ही किये हैं -अच्छे करम..
यही है -
पतन... "
No comments:
Post a Comment