Friday, August 28, 2015

राखी! बंधन जज़्बातों का!

आ रहा है -त्यौहार राखी का...

आ रहा है पर्व -मिलन सखी से सखी का..

मिलन पुराने भगवानों से पुरानी नन्हीं पुजारिनों का....

त्यौहार -पुरानी धुल लगी फोटुओं को मायके में -खूंटे से उतार कर साफ़ होने का...

त्यौहार पुराने बक्सों के अम्मा-बाऊजी के कपड़ों को बेटियों द्वारा बारिश के बाद धूप दिखाने का...

सावन! पुरानी जिल्द लगी भाई -बहिन की यादों को खंगाल कर पुनर्जीवित करने का...

चार दिन बेटियों के हाथ से फूली हुई रोटियां -
माँ पिता को मिलने का...

पुरानी यादों को संवरने का और
जंग लगी संदूकों में सहमी सहमी सी क़ैद...
भाई-बहिन के बचपन की फोटुओं पर ऊँगली फेर... बीते लम्हों को फिर याद करने का.....

नटखट बचपन की नटखट यादों को साझा करने का...
वाकिया बहिन के खिलोने तोड़ने का...
वाकिया भाई की साइकिल आने की लड़ाई का...

बहिन और भाई के
ऊपर बने गानों -"भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना... या
बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बाँधा है...
बजने का! "

सच में!
आ रहा है -त्यौहार राखी का....
(गर्वित गौरव!)

No comments:

Post a Comment