कमबख्त ....
कोई तो होता ....
जो हम पर मरता ;
इस ज़िन्दगी में !
ताउम्र ...
हम ही मरते रहे ..
इस ज़िन्दगी में !
फिर यारो !
मरता कौन है ...
और जीता कौन है ;
मोहब्बत भरी ..
इस ज़िन्दगी में ??
मरना ...
इक बहाना है ....
इस ज़िन्दगी में !
काश कोई समझता
इस ज़िन्दगी में !!"
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