Saturday, July 9, 2016

बारिश का मजमून!

भीगते सभी हैं ; बारिश में !
बस बारिश का मजमून बदल जाता है !

कोई बादलों की बूँदों से .. 
तरबतर होता है ...
तो कोई ....
आँख से टपकी बूँदों से !

आँखों से टपकती बूंदें ...
भी भिगोती हैं ...
कभी दिल को ...
तो कभी दिमाग को ..
अक्सर बारिश में !

चाहे तन भीगे या मन ...
चोला ...
बदलना ही पड़ता है !

तन भीगने पर ...
कपड़े और ...
मन भीगने पर ...
मीत ...
बदलने ही पड़ते हैं !

जो ज़िन्दगी की बारिशों में ...
भीगने पर ....
बदल लेते हैं ....
तन के कपड़े ..
या मन के मीत ..
वो सुकून भरी वादियों में ...
गुज़ारते हैं .  
ज़िन्दगी !

और वहीँ कुछ ....
मेरी तरह .....
बीहड़ों में ...
भटकते रहते हैं ....
ता उम्र ....
अपने भीगे ...
अंतर्मन के साथ !

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