तू बड़ा बेशर्म है रे . ..
इतना तोडा ...
मरोड़ा लेकिन ...
हर बार ..
सांप की तरह ...
फन उठा कर ..
आ जाता है ..
रेगिस्तान के इस पार ....
अपनी औकात दिखाने !
तेरा वह हाल है ...
जैसा . ...
उस कमज़ोर ,
मरघुल्ले कुत्ते का होता है ...
जो . ...
जानता तो है कि ....
वह कुछ ....
उखाड़ नहीं सकता ....
लेकिन -
वह भोंकना ..
बंद नहीं करता ..
क्यों की
यही उसकी फितरत है
या
प्रवृत्ति है !
भोंकना और सिर्फ भोंकना ...
क्योंकि वह जानता है कि ....
काटना ...
उसकी औकात नहीं...
तो क्यों न ...
भोंककर ही ....
अपना जहर उगला जाए
हम भी जानते हैं कि ..
हमारे एक निर्णय से ...
तेरा बंटाधार .....
हो जाएगा !
लेकिन .
हरबार ...
हम द्रवित हो जाते हैं ...
तेरी हालत ..
देख कर ...
पर अब लगता है कि ...
तेरा वह समय आ रहा है ..
जब तू फिर से ....
बंटेगा ..
और हमारी ...
किसी "यूनियन टेरिटरी" जैसा रह जाएगा ...
तेरा विस्तार !
तू दया का ....
पात्र भी है !
न खाने को खाना ..
न ओढ़ने को कपड़े ...
पर
न जाने कहाँ से ..
उगलने को जहर ....
तू ले आता है ...
और हम ...
परेशान हो जाते हैं ...
तेरी बेशर्मी पर !
हमारे यहां "प" से पवित्र ,पावन , और प्रेम का उच्चारण होता है ..
वहीँ तू -
अपने नाम में " पाक " लगा कर .....
बदनाम कर रहा है ...
"प" शब्द की " ...
पाकीजगी " को !
चल तुझे ...
मुबारक ...
तेरी बेशर्मियां ...
और मैं शर्मिन्दा हूँ ...
तुझे बार बार ..
माफ़ करके !!
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