ईद के जश्न पर चंद पंक्तियाँ अपने हिन्दू मुस्लिम मित्रों को और उनकी दोस्ती को समर्पित !
आज पेशानी पर ...
बल नहीं है !
कढ़ाई किये हुए ....
कुर्ते पायजामे पर ...
शिकन नहीं है !
महंगी इत्र की शीशी ...
लगाने का ...
टशन नहीं है !...
और आज दूकान ....
बंद होने का ....
वहम नहीं है !
"आज ईद है ...
आज माबदौलत को ...
कोई भी शिकवा सहन नहीं है !"
आज मुस्कराहट ऐसी कि ...
मोहब्बत भी फीकी पड़ जाए ...
आज ज़र्रानवाज़ी ऐसी कि ...
कुदरत भी शर्मा जाए और
आज ज़िंदादिली ऐसी कि ...
डूबती नब्ज़ भी ...
कुछ पल थम कर ....
ईद मुबारक कह कर ....
गले लग जाए !
"आज ईद है ...
आज माबदौलत को ...
कोई भी शिकवा सहन नहीं है !"
सीमा पार !(पाकिस्तान!) :
उनकी ईद से ज्यादा ...
रौनक है मेरी ईद में !
उनकी ईद से ज्यादा .....
मोह्ब्बत मेरी ईद में !
अगर कभी ....
शक ओ गुमान हो ....
अपनी कैफियत पर ...
तो हिन्दुस्तान के ...
किसी भी शहर ,गली ,कूचे ...
और मोहल्ले में....
गिन लेना ...
गले मिल कर ...
ईद मुबारक देने वाले ...
एक तिहाई हिन्दू होंगे !
ज्यादा कुछ नहीं कहता ...
बस देख लो ...
आज ईद के दिन ...
लाखों हिन्दुस्तानियों के घर ...
एक टाइम का ...
खाना नहीं बना है ...
क्योंकि ...
"भाईजान के घर ...
आज दावत पर ...
तशरीफ़ फरमाना है !"
बरखुरदार !-
"आज ईद है ...
आज माबदौलत को ....
कोई भी शिकवा सहन नहीं है !"
(गौरव !)
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