Saturday, May 14, 2016

राजनीति! "सब नंगे..

राजनीति!
"सब नंगे...
एक से बढ़ कर एक नंगे.. 
कोई महान नंगा तो 
कोई थोड़ा कम..

कोई के बाप दादे भी नंगे थे...
तो अब ये भी उतारू हैं....
नंगों की जमात को.... 
अपना युवा नेतृत्व देने को....

वाह रे राजनीति के मान्यता प्राप्त नंगों!
क्या शौकिया किस्म का भाग्य पाया है...
नंगे हो...
फिर भी चंगे हो...

नग्नता की भव्यता....
और उसका महिमामंडन......
कोई तुम्हारी-
कारगुजारियो से सीखे...

हम थाईलैंड जाएँ तो मसाज.....
और.....
तुम जाओ तो -
"शांति एक खोज!"

हम "सदरी" पहनें तो -हिन्दू साम्प्रदायिक... 
और तुम पहनो तो -"सहिष्णु"!

हम शादी न करें तो -संघी ... 
और तुम न करो तो -"कंट्रीज़ मोस्ट एडमायर्ड बैचलर"!

"अब क्या बताएं ग़ालिब अपने दिल का हाल.... 
बड़े जश्न से रखा था पिताजी ने नाम मेरा- पप्पू...
"बड़े पप्पू" को देख कर .....
लोग मुझे भी -बेवक़ूफ़ समझने लगे!"

जब छोटे थे तो सुनते थे की -
नंबर दो की कमाई खाने वाले का बेटा 
कभी अच्छा नहीं निकलता...
पर अब बदलते
समय में .........
उसमें इन "नंगों की जमात" को 
शामिल करने का मन करता है!

मैं मानता हूँ की.... 
राजनीति और सत्ता के गलियारे में भी...
हवस...
उतारू हो जाती है... 
सत्ता की चाह में!
 
तभी तो...
साठ वर्ष ;
सत्ता का उपभोग करने के बाद भी -
"पप्पू भैया छके नहीं!"

अरे !
अपनी शादी करो और ज़िन्दगी को सार्थक करो !
अपना न सही  ... 
उस डीएनए का तो ख्याल करो जो -
व्याकुल है ;
पीढ़ी दर पीड़ी  ... 
जन्म लेने को। 

सल्तनत काल भी अपने इंतेहा पर पहुंचा  .... 
मुग़ल भी खत्म हुए  ...और 
अँगरेज़ भी रुखसती लिए  .... 
फिर 
हम या तुम  ... 
कोण सी अमरौती  ... 
खा कर आये हैं ?

हिन्दुस्तान का सिंहासन ;
क्या किसी के सिर के बाल हैं जो  ... 
नित नए नए तेल का उपयोग करने से  ... 
उगते रहेंगे ?

अरे कभी न कभी तो बाल झरेंगे ही न -
और 
हमें झरने से पहले ही  ... 
तैयारी कर लेनी चाहिए  ... 
खिजाब या डाई के साथ या  .. 
बिन बालों के जीने की ;
और 
यही कटु सत्य इंगित करता है -
हमारा भविष्य और -
संताप। 



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