"अपनी आँखों के...
जागते सपने ही सच ;
बाकी सब बकवास!
जिससे साथ सात फेरे लिए सात जन्मों के बंधन के...
वही ख़ास ;
बाकी सब बकवास!
जिसको प्यार में भुला दिया फिर कभी न मिलने के वादे के साथ ;
वही नश्वर प्रेम और विश्वास ;
बाकी सब बकवास!
जिसके आँचल से खेल कर बड़े हुए...
वही ममत्व;
बाकी सब बकवास!
जिसके साथ लड़-झगड़ कर साथ-साथ बड़े हुए और शिकवा-शिकायतों के बीच राखी बंधवाई ... वही रक्षाबंधन ;
बाकि सब बकवास!
जिस भाई से जीवन भर मिलकर रहे...
वही भाई ;
बाकी सब बकवास!
जिस बेटे ने पिता का बुढ़ापे में हाथ थामा.. वही पुत्र ;
बाकि सब बकवास!
जिस पिता ने पुत्र को आभास कराया जीवन की दुश्वारियों और परछाइयों का...
वही पिता ;
बाकि सब बकवास!
और
जिस भगवान् ने कंटीले रास्तों में होंसला दिया...
वह भगवान् ;
बाकी सब बकवास! "
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