वर्ष 1978
मेरा आठवाँ जन्मदिन!
मेरी जिद्द : कानपूर से लाया प्रिंस सूट और कैप पहन कर केक काटूँगा!
घर से कानपूर की दुरी 200 किलोमीटर!
पापा उस जमाने में अपनी दिल्ली नंबर की राजदूत मोटरसाइकिल से गए और मेरी ख्वाईश पूरी की!
छोटी छोटी यादें संजो कर रखे हूँ... अपने मन के एल्बम में!
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Monday, May 23, 2016
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