अँधेरे के तिलिस्म में -
अच्छी लगती हैं ; रातें!
हमेशा अंधेर...
अंधेरों में ही मचता है-
हादसा बनकर!
या भ्रष्टाचार बनकर।
सब कुछ काला!
सफ़ेद भी काला...
और
काला भी काला!
सफ़ेद भी काला...
और
काला भी काला!
सत्य भी काला...
और
झूंठ भी काला!
और
झूंठ भी काला!
नहीं कोई रंग ऐसा..
जो बदल दे..
रात का साया!
जो बदल दे..
रात का साया!
सब कुछ काला...
उजले वस्त्र भी काले..
और
पतित भी काले!
उजले वस्त्र भी काले..
और
पतित भी काले!
रात को अक्सर अंधेरों से
दोस्ती करना मुनासिब होता है....
क्यूंकि
अंधेरों में अक्सर....
अंधेरों में अक्सर....
चांदनी साथ देती है...
राह प्रशस्त करने में!
राह प्रशस्त करने में!
रात के अंधेरों में...
सबकुछ गुम जाता है...
अँधेरा बन और..
कुछ नहीं रह जाता...
साबित करने को...
अपनी ईमानदारी !
अँधेरा बन और..
कुछ नहीं रह जाता...
साबित करने को...
अपनी ईमानदारी !
देश १५ अगस्त की तड़के सुबह आज़ाद हुआ था..
तब भी अँधेरा था .....
तब भी अँधेरा था .....
और
आज भी अंधेरों से सराबोर है -
आज भी अंधेरों से सराबोर है -
भारतीय संसद!
कुछ लोग ....
उच्च सदन में टोर्च लिए..
जुटे हुए हैं
अंधेरों से लड़ने में ....
जुटे हुए हैं
अंधेरों से लड़ने में ....
और उन्हें पता नहीं की -
भ्रष्टाचार से सराबोर ....
भ्रष्टाचार से सराबोर ....
लोगों की ड्राई बैटरी ने अभी
काम करना बंद नहीं किया है।
काम करना बंद नहीं किया है।
गुलिस्ता इन्तिज़ार कर रहा है।
किसी बिजली गिरने का...
या एक ऐसे प्राकृतिक भूकम्प का
जिससे
खत्म हो जाएँ ये
सिंघासन बत्तीसी के-
जिससे
खत्म हो जाएँ ये
सिंघासन बत्तीसी के-
ये पिपासु!!

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