इस होली चलो गुज़रे दिनों की सैर पर जाते हैं !
चलो गुलाल लगते हैं !
चलो कुछ पुराने गीत गुनगुनाते हैं !
उन धीमीं धीमीं यादों की भट्टी को ....
फिर कुरेद कर ...
धीमीं आंच में सुलगाते है !
गुज़री उम्र के फासलों को
नाप कर आते हैं !
तुम्हें याद है ???
जब उम्र से ...
हम नहीं शर्माते थे !
और जवां दिलों में खूब ...
होली के पानी से आग लगाते थे !
तुझे तन से और मन से ...
भिगो कर ..
जो उभरता था ;अक्स ...
भिगो कर ..
जो उभरता था ;अक्स ...
अपनी मोहब्बत का !!
उसपर हम कितने ..
मर मर जाते थे !
मेरा तेरे गालों को रंग कर ..
और तेरा मेरे सीने में सिमट कर ...
जो लरजता था ;अक्स
शर्म ओ हया का !
उन लम्हों पर हम ...
सच ....
कितनी कसमें खाते थे !
दोहरा कर अपनी जुल्फों को ...
जो निचोड़तीं थीं तुम ..
अपनी काली घटाओं को
मेरे भिगोने पर !
और ....
जो निचोड़तीं थीं तुम ..
अपनी काली घटाओं को
मेरे भिगोने पर !
और ....
मैं भिगो कर भर देता था ..
तुम्हारी मांग को ...
अपनी मोहब्बतों के ..
गुलाबी रंगों से !
तुम्हारी मांग को ...
अपनी मोहब्बतों के ..
गुलाबी रंगों से !
और ...
फिर जो उभरता था ..
समुन्दर से भी गहरा अक्स ;तेरा ....
ऐसा था ;रूप तुम्हारा ...
और मनती थी ...
अपनी अल्हड़ सी स्वछन्द ...
चोरी चोरी ...होली !
फिर जो उभरता था ..
समुन्दर से भी गहरा अक्स ;तेरा ....
ऐसा था ;रूप तुम्हारा ...
और मनती थी ...
अपनी अल्हड़ सी स्वछन्द ...
चोरी चोरी ...होली !
सच !कितनी हसीं होली ...
हम साथ साथ मनाते थे !
कोई देख लेगा ..
कोई आ जाएगा ..
नहीं न ..
तुम समझते क्यों नहीं ?
प्लीज ;मांग में नहीं ..
मम्मी बहुत गुस्सा होगी ..
जैसी बेफिक्रियों के साये में ..
कोई आ जाएगा ..
नहीं न ..
तुम समझते क्यों नहीं ?
प्लीज ;मांग में नहीं ..
मम्मी बहुत गुस्सा होगी ..
जैसी बेफिक्रियों के साये में ..
अपनी होली ...
हम कैसे मनाते थे !
साँसों से मिलतीं थीं ;साँसें
और धड़कन से धड़कन ..
तन से हथेली और
मन से ...
वचनों की बोली !
और धड़कन से धड़कन ..
तन से हथेली और
मन से ...
वचनों की बोली !
सच ...
कुछ कुछ ऐसे ही ..
मनती थी ..
अपनी ..
दो दिलों की ..
लरजती सिमटती ..
प्यारी सी होली !
अब जब कि उम्र ने भी ...
अपने होली के रंग ...
हम दोनों पर दिखाना शुरू कर दिया है !
कनपटी और जुल्फों पर ...
सफेदी के रंगों ने ..
भिगोना शुरू कर दिया है !
चलो .....
अब रंगों को एक किनारे रख कर ....
गुलाल को अपनाते हैं !
कुछ पुराने गीत गुनगुनाते हैं !
आओ नफासत और नज़ाकत से ....
गालों पर गुलाल लगाते हैं !
और फिर ...
हाथों में हाँथ थाम ;पुनः ...
गुज़रे दिनों की सैर पर जाते हैं !
गर्वित गौरव!

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