जो बरबस ..
बरसता रहता है ...
यहां वहां ..
तप्त बदली सा ...
यूँ ही ..
यकायक !
बरसता रहता है ...
यहां वहां ..
तप्त बदली सा ...
यूँ ही ..
यकायक !
समझ नहीं आता की ..
यह क्या है ?
क्यों??
जूंझता रहता हूँ ...
इन मतलबी शब्दों से ...
जिन्होंने ..ज़िन्दगी के ..
महत्वपूर्ण मोड़ों पर ...
मुझे सदा झुठलाया है !
यह क्या है ?
क्यों??
जूंझता रहता हूँ ...
इन मतलबी शब्दों से ...
जिन्होंने ..ज़िन्दगी के ..
महत्वपूर्ण मोड़ों पर ...
मुझे सदा झुठलाया है !
आखिर मन्ज़िल कहाँ है ??
कौन है ...
वह जो रोकेगा ...
यह बरसना ?
कौन है ...
वह जो रोकेगा ...
यह बरसना ?
तटबन्ध कहाँ हैं ?
जो बांधेंगे ...
इन सुलगते विचारों के ..
फलसफे को ?
जो बांधेंगे ...
इन सुलगते विचारों के ..
फलसफे को ?
कब तक चलेगी ...
ये अंगूठे और अक्षरों की ..
कभी न ख़त्म होने वाली ...
दोस्ती और दुश्मनी ?
ये अंगूठे और अक्षरों की ..
कभी न ख़त्म होने वाली ...
दोस्ती और दुश्मनी ?
कौन है ?
जो हांक रहा है ?
मेरी कलम और उसकी स्याही को ?
जो हांक रहा है ?
मेरी कलम और उसकी स्याही को ?
मुझे पता है !
हांकने वाले वे हैं ..
जो ;अब नहीं हैं !
हांकने वाले वे हैं ..
जो ;अब नहीं हैं !
हाँ ! वे ही हैं; मेरे खिवैया!
जो अपने जाने के ..
दो दशकों के बाद भी ...
लहू बन ..
समाये हुए हैं ...
रगों में ..
मेरे पिता बन !
जो अपने जाने के ..
दो दशकों के बाद भी ...
लहू बन ..
समाये हुए हैं ...
रगों में ..
मेरे पिता बन !
न जाने क्यों ...
आज भी ...
अपने कांधों पर ...
महसूस करता हूँ ...
आपका हाँथ ...
और दिलो दिमाग पर ..
महसूस करता हूँ ...
आपका राज !
आज भी ...
अपने कांधों पर ...
महसूस करता हूँ ...
आपका हाँथ ...
और दिलो दिमाग पर ..
महसूस करता हूँ ...
आपका राज !
कुछ तो ....
ऐसा नहीं है ...
जो आपका न हो !
ऐसा नहीं है ...
जो आपका न हो !
ये शब्द ...ये अक्षर !
ये भाव ..ये लगाव !
ये साँसें ..ये धड़कन !
ये उमंग ..ये प्रसंग !
सब कुछ तो ...
आपका अक्स है !
ये भाव ..ये लगाव !
ये साँसें ..ये धड़कन !
ये उमंग ..ये प्रसंग !
सब कुछ तो ...
आपका अक्स है !
इसलिए कहता हूँ -
आप ही हैं ...
जो सदा परछाईं बन ..
कभी शब्द बन ..
कभी शहद बन ...
समां जाते हो ...
मेरे वज़ूद में !
और ...
मैं इन उँगलियों से ...
रचता रहता हूँ ...
वह किताब ...
जो अधलिखी ...
छोड़ गए थे ;आप !
आप ही हैं ...
जो सदा परछाईं बन ..
कभी शब्द बन ..
कभी शहद बन ...
समां जाते हो ...
मेरे वज़ूद में !
और ...
मैं इन उँगलियों से ...
रचता रहता हूँ ...
वह किताब ...
जो अधलिखी ...
छोड़ गए थे ;आप !
एक ताक़त सी ..
मिलती है ..
आपको सुमर कर !
मिलती है ..
आपको सुमर कर !
और सच ..
आपकी कसम ...
प्यारे पापा !
आज ..
इतना बड़ा हो गया हूँ ..
लेकिन लगता है ...
आपकी गोद का ही ..
परिंदा हूँ !
आपकी कसम ...
प्यारे पापा !
आज ..
इतना बड़ा हो गया हूँ ..
लेकिन लगता है ...
आपकी गोद का ही ..
परिंदा हूँ !
मिलते रहना ..
आते रहना ..
सुलगाते रहना ;
मनोभावों को !
आते रहना ..
सुलगाते रहना ;
मनोभावों को !
और कसम से ..
मैं वहीँ पहुंचूंगा ...
जहां आपकी सोच थी !
मैं वहीँ पहुंचूंगा ...
जहां आपकी सोच थी !
Garvit Gaurav!

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