Friday, March 24, 2017

कहीं तो कोई होगा!

Good Night Zindagi!
कहीं तो कोई होगा जो .. समझेगा मेरा यह धुंआ ?
कहीं तो कोई होगा जो ... समझेगा मेरी यह राख ?
और
कहीं तो कोई होगा जो ... समझेगा मेरी यह आग ?
या ..
यूँ ही धुंआ, आग और राख के दायरों के बीच से हवा बन निकल जाऊँगा ...
बहुत दूर ...
क्षितिज से उस पार ..
कभी नहीं लौटने के लिए ??

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