गर्मियों में असल औकात पता चलती है ; जब एसी कूलर और फर्राटा पंखों के बीच बंट जाता है इंसान !
जब फ्रिज़ सुराही और मटकों की दीवार खड़ी हो जाती है हलक में ठंडी प्यास बन कर !
जब जूस,कोल्ड ड्रिंक लस्सी ठंडाई और शरबत बयां करने लगते हैं ;आदमी की हैसियत !
जब आइसक्रीम कुल्फी और बर्फ के गोले भी सेंध लगा कर बचपन को बाँट देते है अमीर गरीब की गर्मी की तपन को !
जब रे-बैन,फैंदी और बरबरी जैसी चश्मों की विश्वस्तरीय ब्रांड तय करते हैं ;दुनिया से रूबरू होने की जद्दोजहद में आँखों की औकात !
वर्ना सर्दियों में तो
रुई की रज़ाई में दुबक जाते हैं सारे अमीर और गरीब जानवर ;
एक इंसा के नक़ली भेष में !
सच यार !
गर्मियों में गर्मी से निजात पाने को ये आदमी इतना नीचे गिर जाता है कि -बस बेलिबास होने से रह जाता है !
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Monday, March 27, 2017
गर्मी में बंटता इंसान !
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