Monday, March 27, 2017

गर्मी में बंटता इंसान !

गर्मियों में असल औकात पता चलती है ; जब एसी कूलर और फर्राटा पंखों के बीच बंट जाता है इंसान !
जब फ्रिज़ सुराही और मटकों की दीवार खड़ी हो जाती है हलक में ठंडी प्यास बन कर !
जब जूस,कोल्ड ड्रिंक लस्सी ठंडाई और शरबत बयां करने लगते हैं ;आदमी की हैसियत !
जब आइसक्रीम कुल्फी और बर्फ के गोले भी सेंध लगा कर बचपन को बाँट देते है अमीर गरीब की गर्मी की तपन को !
जब रे-बैन,फैंदी और बरबरी जैसी चश्मों की विश्वस्तरीय ब्रांड तय करते हैं ;दुनिया से रूबरू होने की जद्दोजहद में आँखों की औकात !
वर्ना सर्दियों में तो
रुई की रज़ाई में दुबक जाते हैं सारे अमीर और गरीब जानवर ;
एक इंसा के नक़ली भेष में !
सच यार !
गर्मियों में गर्मी से निजात पाने को ये आदमी इतना नीचे गिर जाता है कि -बस बेलिबास होने से रह जाता है !

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