Sunday, March 20, 2016

अर्धनारीश्वर से दिल की बातें !

ओ शास्वत सत्य !
ओ अर्ध्य सत्य !
ओ जन्म और मृत्यु के सृजक !
ओ कालजई !
ओ अनाम परछाईं !
कितनी उपाधियाँ और कितने नाम दूँ ;तुम्हें  ?
पर
भगवान नहीं कहूँगा।
और
बातें करता चला जाऊँगा  .....
बेतुकी  ....
बेतकुल्लफी के साथ ;
क्यों कि
अब मेरा -तुम से  ....
कुछ ज्यादा -स्वार्थ बचा नहीं।

और जब स्वार्थ न रहे  ....
तभी मोहब्बत -
अपना मुकाम  ...
हासिल करती है।

मुझे नहीं पता तुम हो के नहीं ?
कभी न देखा न सुना ?
कभी न तुम खुद मिले न बुलाया ?
बस यूँ ही  ...
देखा था तुम्हें -बचपन से  ...
अपने घर के -पूजा घर में  ... तो
पूजता और  मानता चला जा रहा हूँ ;मैं भी  ;
इस अंतहीन यात्रा के लम्बे सफर में
पथिक बन के  .....
कि यकीनन -
यात्रा के अंतिम पड़ाव पर  ....
तुम खुद आओगे  ....
मुझसे मिलने और
कहोगे कि -
कैसा रहा यह सफर ????

पर हे मेरे प्रश्न चिन्ह !
कभी तो उत्तर दे दिया करो ;
अपने वज़ूद का  ....
अपने आकार का ?
अपने लिबास का ?
जब दुनियां तुम्हें ही
प्रश्न चिन्ह लगा कर पूंछने लगे कि -
आप कौन ?

अब बहुत दिन हो गए -
सुनते सुनते कि -
राजा राम ने अवतरण लिया था इस पृथ्वी पर ;
या किशन कन्हैया ने कभी बांसुरी भी बजाई थी ;
पर -
अब ये किस्से थोड़ा पुराने हो गए हैं और   ...
प्लीज -
एक बार दुबारा आकर  ...
लगा दो हम जैसे अनगिनित लोगों के -
मुह पर -पूर्ण विराम !

अगर आप -अल्ल्हा मियां ,गुरुनानक साहिब और जीजस महोदय
सब एक हैं [
और
ऊपर आप जैसे लोगों का कोई -यूनियन है ;
तो हमें भी तो बताओ ?
हम बेफाल्तू में लड़ लड़ कर
मरे जा रहे हैं ?

फिर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि  -
आप  किस  पार्टी में हैं या -
आप आरएसएस के साथ हैं या वामपंथियों के साथ ?
मुझे तो बस इतना मालुम है कि -
आपके पास -
हमारा रिमोट कंट्रोल है और -
वही होता है -जैसा  ....
आप चाहते हैं।

रही बात मेरी  तो -
हे मेरे शंकर !
थोड़ा परेशान हूँ  ...
थोड़ा सशंकित और थोड़ा डरा हुआ कि -
वक़्त कम ही बचा है  ...
पेपर देते देते  ....
ज़िन्दगी निकल गई है  पर
रिजल्ट नहीं खुला !

देखना मेरे शंकर !
मेरे शम्भू !मेरे महा देव !
सपने ;सपने न रह जाएँ !
दूसरी पीढ़ी  .....
फिर मेरे जैसे  .....
सपने न बुने  ..... पर
मेरे सपनों में -
हकीकत के रंग भरें।
और
उस रंग भरी सफलता के -
पूजा घर में  ....
तुम्हारी तस्वीर के नीचे  ...
किसी कोनें में ;
तुम्हारे चरणों की धुल तले  ...
कहीं मेरा बेटा ;
एक दिया ;
मेरे नाम का भी -
उदीप्त कर रहा हो  ...
इस भाव से कि -
उसके पापा ने  ...
अपना कर्तव्य किया !!!

कभी समय मिले -
तो अहसास कराना कि -
तुमने मेरी चिट्ठी पढ़ ली है और -
जल्दी ही मेरा रिजल्ट भी
लौटती डाक से
भेज रहे हो !

आपका हमेशा -
शानू !


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