Friday, March 25, 2016

यादों की होली!

होली के खुमार उतर  जाने के बाद -
आज चाँद भी...
बहुत खामोश है...
आसमान भी...
तन्हां तन्हां सा...
दिख रहा है ;
ठीक मेरी तरह -
नस्तनाबूत!

होली के रंगों के बीच..
आज भी...
इतने बरस बाद...
अक्सर...
तुम छिटक आती हो -
डूबते सूरज की लालिमा लिए...
और होली के बाद...
रंगों के मानिंद...
फिर खो जाती हो ...
फिर अगले बरस
यादों की होली
खेलने के लिए! "

"हर बरस...
यादों की होली...
खेलने के लिए -
बधाई!"

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