Sunday, March 6, 2016

मेरे शम्भू!!! बस एक बार!

मेरे शम्भू!!!
बस एक बार -पुनः
उठा कर डमरू ;कर दे अन्तर्नाद...
उठा कर त्रिशूल ;कर दे अन्तर्नाद...
लपेट कर धूनी की राख; कर दे अन्तर्नाद...
और
खोल दे अपना -तीसरा नेत्र और
अहसास करा अपने वज़ूद का...
और सबक सीखा उनको...
जो कर रहे हैं तेरे भक्तों को विचलित-
आतंक के साये से!

बस एक बार फिर दिखा दे -
अपनी रौद्रता और सामर्थ्यता...
क्यूंकि
तेरी "भद्रता और भव्यता" के साये में...
तेरी हरी भूमि...
तेरे ज्योतिर्लिंग...
अब सशंकित हैं!

"ओम नमः शिवाय!"

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