Thursday, August 11, 2016

पन्द्रह अगस्त !


एक सब्र ही तो है जो एक आम हिंदुस्तानी के पास बेशुमार है:
  • काश्मीर को युद्ध का मैदान बंनने देने का सब्र।
  • भारत को गाली देने पर उसे सुनने की सब्र।
  • पाकिस्तानी झंडों को काश्मीर में लहराते देखने का सब्र !
  • दलित के नाम पे चुनाव की बिसात बिछने देने का सब्र।
  • आरक्षण के नाम पे नए माई-बापों के पैदा होने पर उन्हें झेलने का सब्र।
  • संसद में काश्मीरी बगावत को शह देने वालों के भाषण को सुनने का सब्र।
  • मोदी को बेइज़्ज़त करने की जगह तलाशते नेताओं को जबरदस्ती सहने का सब्र।
  • देश के दुश्मनों को देश का ही नमक खा कर नमक हरामी करते देखने का सब्र।
  • देश के रक्षक -सेना पर मिथ्या आरोप लगाते गद्दारों को सुनने का सब्र।

और
हमारा इतने सारे झूठों के साथ ज़िन्दगी गुज़ारने का सब्र ।

जागो भारत जागो !
एक दिन तो सोचो इन गद्दारों के खिलाफ !








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