Saturday, August 20, 2016

ज़िन्दगी में -नफा नुकसान

आज बारिशें हैं ...
तो खिसिया रहे हो !
कल सूखा था ...
तो गिगिया रहे थे !

आज पानी ही पानी है ..
तो मर रहे हो !
कल पानी नहीं था ...
तो मर रहे थे !

कल मोहब्बत थी तो..
औकात नहीं थी और
आज औकात है तो ..
मोहब्बत नहीं !

कल ख्वाइशें थीं तो ...
हम नंगे थे !
आज हम उजले है ...
तो ख्वाइशें ...
तफरीह करने निकल गईं !

बस ऐसे ही ...
चलता रहता है ...
ज़िन्दगी का पहिया !

जब धूप चाहिए ...
तो छाँव मिलती है और ..
जब छाँव चाहिए तो ...
धूप !

बहुत अधिक ...
किसी को चाहो तो ..
वो जुदा हो जाता है और ..
नफरत करो तो ....
ताउम्र आसपास ही
मंडराता है !

और यही ...
ज़िन्दगी का तसव्वुर
हमें सताता है कि -
कुछ भी हमारे हाथ ...
नहीं आता है !

बहुत ध्यान देने के बाद भी ...
ज़िन्दगी की देगची का ..
दूध उफ़न ही जाता है !

इसलिये बहुत अधिक ..
सौदा न करो ...
ज़िन्दगी से !

नफे नुक्सान की
उम्मीद में ..
कुछ भी हाँथ ...
नहीं आता है !

इंसा खाली हाँथ ....
आया था और ..
खाली हाँथ जाता था !

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