आओ आज किचन में घुंस कर अपने हाथों की चाय माँ पापा को पिलायें !
आओ कुछ पल कुर्सी सोफे से उतर कर ज़मीन में पैर फैला कर बैठें और अखबार पढ़ें !
आओ बाज़ार से कैंथा या टमाटर खरीद कर चटनी सिल बट्टे पर पीस कर पकोड़ी के साथ ऊँगली से चाट चाट कर खाएं !
आओ घर पर पुलाव या तिहरी बनवा कर पालथी मार कर थाली में फैला कर फूंक फूंक फूंक कर खाएं !
आओ आज माँ पापा या घर के बुजुर्ग के बालों में शेम्पू करें !
आओ किसी गाये को हरा चारा खिलाएं !
आओ किसी पुराने मित्र के मोबाइल की घंटी बजाएं !
आओ ब्लैक एंड वाइट ज़माने के कुछ नग्में गुनगुनाएं !
आओ आज संडे मनाएं !
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Saturday, August 27, 2016
आओ आज संडे मनाएं !
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