क्यों साँपों को करते हो बदनाम ...
उनकी डसने की कला पर ?
उनसे ज्यादा तो हम खुद ..
एकदूसरे को डसते रहते हैं ...
अपनी जहरीली कारगुज़ारियों से !
खुद ईश्वर ने -
किया था उनको ...लबालब ...
उस जहर से ...
जो आज ..
हमने छीन लिया है ...उनसे ...
और डसते रहते हैं ..
अपनों को ही ..
रात दिन !
वो तो बिचारे ..
तभी डसते हैं ...
जब कोई करता है ...
उन पर वार !
पर हम तो बस ...
यूँ ही डसते रहते हैं ...
रात दिन ...
उन सभी को ..
जो बढ़ गए हैं ...
आगे हमसे ..
अपनी मेहनत ..
और लगन से !
साँपों के जहर से खतरनाक है हमारा जहर !
उनके जहर का ...
तो इलाज़ है !
या एक लाठी का प्रहार कर देता है उनका काम तमाम !
पर
काश्मीर के साँपों का ...
नक्सलवाद के साँपों का ..
राजनीति में घुसे ...
आपराधिक प्रवित्ति के साँपों का ..
दलित राजनीति करने वाले साँपों का ..
असहिष्णु साँपों का ..
भारतीय पुरूस्कार लौटाते साँपों का ..
क्या उपचार है ??
आज नागपंचमी है !
आओ पूजें ...
इन कलयुगी साँपों को ...
और निवेदन करें -
कि ये लौट जाएँ ...
अपने अपने बिलों मैं वापस ...
अपने अराजक जहर के साथ ...
और न डसें ...
हमारी "बची - खुची" ....
भारतीयता को ;
जिससे ज़िंदा रहे भारत !!!
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