Sunday, August 21, 2016

कशमकश और किशमिश !

कसमकश भरी ...
ज़िन्दगी में ..
किशमिशों की चाह
न रही !

अब तो -
ये समझ लो ..
जो कसमकश में मज़ा है ..
वह किशमिशों में नहीं !

उठा पटक सही ...
बेवफाई हो या दोगलाई ..
गद्दारी हो या रस्साकशी ...
हर तरफ ...
उसीने पटकनी खाई ...
जिसने किशमिशों की ...
बात चलाई और ..
धुरन्धर निकाल ले गए
जीत का सेहरा ...
कशमकश के बीच ...
क्योंकि -
उसने भी कभी थी -
धूल और नाकामी खाई !

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