अगर हो जाए दीदार ;आज ..
तुझ से मेरा ....
जुदाई के ...
पचीस बरस बाद ..
तो यकीनन ...
झुक जाएंगी तेरी नज़रें ...
मेरी सलामती और ...
बेफिक्री देख के !
बड़े बड़े कसीदे पढे थे ;
जो मैंने ...
तुझ से जुदा होने पर -
मिट जाने के ..
वो टूट जाएंगे ...
एक क्षण में ...
मुझे मुस्कराता देख कर !
हक़ीक़त तो यह है कि ...
मरता नहीं कोई ...
किसी की जुदाई में -
ये तो बस ...
उम्र के ...
दो पलों का फितूर है ....
जो जुबां को अपनी तरफ मिला कर ....
शब्दों का आकार ...
ले लेता है ...
और ...
हम गुज़ार देते हैं ...
एक उम्र ;
कस्मे वादों की खातिर ..
किसी के -
इन्तिज़ार में !
फिर जब ...
मोहब्बत दोनों और से ..
होती है तो ..
फिर इन्तिज़ार ...
दोनों क्यों नहीं करते ???
एक गुज़ार देता है ...
सारी ज़िन्दगी ..
इस खुशफहमी में कि -किस्मत ने दिए धोके ...
वरना ...
वो होती तो ...
मेरी होती !!
और वहीँ दूसरी और ..
" तुम " चल देती ...
किसी और का ...
हाँथ थाम के कि -
यही है जीवन का दस्तूर ...
भले ही हमें हो वो नामंज़ूर !
और यही कुछ ...
चिरन्तन सत्य हैं ...
जो मैंने समझे और जाने ..
और आज ...
तुम्हें इतने सालों बाद ..
देख ..
लगा मैं -मुस्कुराने !!
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